Thursday, February 7, 2019

सरकारी नौकरी लोग इसलिये करना चाहते हैं कि

सरकारी नौकरी लोग इसलिये करना चाहते हैं कि :—
  • एक बार मिल गयी तो आराम से कोई छुड़ाने वाला नहीं है।
  • मक्कारी करने की आजादी है।
  • यूनियन ज्वाइन करके शैल्टर ले लो।
  • आफिस के बाबू ने दिन भर में एक लैटर लिख दिया तो बहुत काम कर दिया।
  • काम करना नहीं अटकाना आना चाहिए।
  • यहाँ ज्यादा पढ़े लिखे और होशियार लोगों की जरूरत नहीं है, मेरे जैसे।
  • पीछे फाइल देख कर आगे चलो।
  • इंक्रीमेंट तो मिल ही जाना है।
  • हर 6 महीने में DA भी बढ़ जाना है, बिना माँगे।
  • बोनस है, ट्रासपोर्ट अलाउंस है सारी सुविधाएं हैं।
  • अधिकारी हैं तो घर के लिए बंगला पिओन और कुछ कर्मचारी अनआफिशियली भी बंगले पर मिलेंगे।
  • सरकारी जीप मिलेगी।
  • काम नहीं करना है तो वेवकूफ बने रहो, कोई काम ही नहीं बताएगा। जिसे काम आता होगा उसे ही काम से लादा जायेगा। इसी लिये मराठी में कहावत है - ‘येड़ा बनके पेड़ा खाओ’ । येड़ा का अर्थ है पागल/वेवकूफ।
ये ही सब चीजें हैं सरकारी काम के पीछे भागने के। लेकिन सारे डिपार्टमेंट ऐसे नहीं है। मिलिट्री, रेलवे के 4 इंजीनियरिंग विभाग, आपरेटिंग विभाग, रनिंंग विभाग आदि की नौकरी बहुत मुश्किल है।
चाय वाले का धन्धा करना है, तो शाम को सोने से पहले सुबह के लिए मटेरियल है कि नहीं ये चिन्ता करनी पड़ेगी। सुबह जल्दी उठने की चिन्ता करनी पड़ेगी। ठेला लगाते हो तो पुलिस वाले का हफ्ता, नगरनिगम वालों का हफ्ता। किसी दिन कप, गिलास धोने वाल लड़का नहीं आया तो या तो खुद धोओ, नहीं तो उस दिन काम बन्द। धन्धा छोटा हो चाहे बड़ा, उसके बारे में 24 घंटे सोचोगे तो ही चलेगा।
नौकरी वाला 7–8 दिन या 15–20 दिन की छुट्टी ले के शादी, विवाह या घूमने जा सकता है। धन्धे वाले को एक दिन भी दुकान बन्द करनी पड़ जाये तो उन्हें रोना आता है।

No comments:

Post a Comment